9/15/10

उस्ताद बिस्मिल्ला खान: इंटरव्यू, शहनाई के बीच- 2

छुटपन में मेरे अपने गाँव में विदा होते वक्त लडकियां रोते-रोते रोने के कारणों को भी बताती जाती थीं. मतलब कि रोने के राग में वे अपने गद्यात्मक दुखों को पिरो देतीं थीं. उस्ताद के इंटरव्यू का यह भाग रोने और राग के बीच के अद्भुत रिश्ते को हमारे लिए और खोल देता है. हाल की अवस्था और क्या है सिवाय इसके कि हमारे दुःख और हमारी प्रार्थनाएं राग में घुल जाएँ.
अब सुनिए इस इंटरव्यू का यह दूसरा भाग, जिसमें उस्ताद इशारा कर रहे हैं कि मनुष्य की ज्यादातर प्रार्थनाएं राग का रूप लेकर ही आती हैं. आदिम काल से संगीत मनुष्य की अभिव्यक्ति का जबरदस्त जरिया रहा है. संगीत की यह आदिमता उसे मनुष्य की सबसे भीतरी और मूल दुनिया तक ले जाती है और इसका रास्ता हमारे दुखों से होकर ही गुज़रता है.

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