9/6/10

मुकुल शिवपुत्र

आज सुनिए मुकुल शिवपुत्र से,
'जाओ वहीं तुम श्याम' बंदिश
बेहद प्रतिभाशाली, फक्कड़ और मौजी संगीतकार मुकुल कि आवाज़ में एक ख़ास खसखसापन है, अनगढ़पन है जो सुनने वाले को अपनी और बुलाता भी है और बहुत नजदीक भी आने नहीं देता. उनकी गायकी इस परिचय की मुहताज नहीं कि वे कुमार गन्धर्व के बेटे हैं. प्रतिभाशाली लोगो के पुत्र भी प्रतिभाशाली हों, अमूमन तो ऐसा नहीं होता. अव्वल तो वे वह रास्ता नहीं लेते जिनपर उनके पिता चले और दूसरे अगर ऐसा कर भी लिया तो ता-जिन्दगी पिता की छाया से मुक्त नहीं हो पाते. इस सबसे मुकुल बहुत अलग हैं, हाँ, उनकी गायकी में कुमार साहब की गायकी का गहरा असर जरूर महसूस कर सकते हैं.

2 comments:

PN Subramanian said...

बहुत बहुत आभार.. इंदौर के दिलीप कवठेकर जी ने एक विडिओ अपने ब्लॉग पर डाली थी तब से ही हम तलाश में थे की मुकुल जी के द्वारा गाये और कुछ compositions कहाँ मिल सकते हैं.यदि आपके संग्रह में हो तो कृपया उपलब्ध कराएँ. .

MandarPurandare said...

Great ! Wonderful! Aprateem! Badhiya!