9/12/10

मिले सुर मेरा तुम्हारा- भीमसेन जोशी


जब अभी नए गायकों कलाकारों से देश की एकता बताने के लिए 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गवाया गया तो लगा कि संगीत के क्षेत्र में हिन्दुस्तानी शासक वर्ग की समझ लगातार बदतर होती जा रही है. अगर कहीं आप इसका वीडिओ देख लें तो फिर खुदा भी पता नहीं आपकी खैर कर पायेगा या नहीं! सौंदर्यशास्त्र के नए पैमाने उन्हीं को मुबारक! इसे ही मुक्तिबोध जड़ीभूत सौंदर्यशास्त्र कहा करते थे.
इसी के साथ याद आना ही था पुराना 'मिले सुर मेरा तुम्हारा', पंडित भीमसेन जोशी की मेघ मंद्र आवाज़ में.
आज सुनिए पुराना 'मिले सुर मेरा तुम्हारा'

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