9/16/10

उसने खुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की -मेंहदी हसन/ आबिदा


कू ब कू फ़ैल गयी बात शनासाई की
उसनें खुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की...
परवीन शाकिर की चर्चित ग़ज़ल को कई बड़े गायकों ने स्वर दिए हैं.
इस ग़ज़ल की खूबसूरती मेरी समझ में यह है कि एक औरत के दुःख इसमें लिरिकल हो गए हैं.
लिरिकल से सरल का नहीं बल्कि मैं विस्तार का अर्थ ले रहा हूँ. इसीलिये ग़ज़ल की गति मंथर हो उठी है. मेंहदी हसन की अदायगी में यह बात महसूस की जा सकती है. वे इस ग़ज़ल को और भौतिक बना देते हैं. पर आबिदा की आवाज़ और अदायगी का रहस्य उसके ऊपर से आने में है, इसी नाते ग़ज़ल को निभाते हुए वे उसे गहराई की बजाय ऊंचाई का आयाम अता कर देती हैं.
एक ही ग़ज़ल जब दो गायक गा रहे हों तो तुलना करने का मन करने ही लगता है. पर इस तुलना को छोड़, आइये सुना जाये परवीन शाकिर की इस ग़ज़ल को-