9/13/10

मुकुल शिवपुत्र की गाई दो और बंदिशें

मुकुल शिवपुत्र की दिमागी हालत खराब बताने वालों की कमी नहीं, पर ऐसे 'चतुर-सुजानों' के दिवालियेपन का किया भी क्या जा सकता है! ये एक लाईलाज बीमारी है.
एक ऐसा आदमी जो इस दुनिया को थोड़ी अलग तरह से देखने की कोशिश करे, इसमें फिट होने से इनकार कर दे, उसको विक्षिप्त बताना कोइ नयी बात नहीं. निराला को याद करिए और सोचिये!

इस समाज में अपने से अलग किसी भी इंसान को बर्दाश्त करने की संवेदनशीलता का खात्मा हो गया है, अब यहाँ एक ही तरह के लोग रहेंगे, जो अलग होगा उसे काट छांटकर अपने में शामिल कर लिया जाएगा. यह भी ख़ास तरह का भूमंडलीकरण है. मुकुल शिवपुत्र की कला इसके प्रतिवाद में खड़ी है.

मुकुल शिवपुत्र पर लगाई गयी पिछली पोस्ट में सुभ्रमनियम जी ने फरमाईश की थी कि मुकुल साहब की गाई कुछ और बंदिशें पेश की जाएँ, सो उनके गए दो छोटे कम्पोजीशन ये रहे-


3 comments:

दीपक 'मशाल' said...

:) ye muskaan kaafi hai tumhare bholepan ke liye dost

PN Subramanian said...

बहुत ही आभार. डाउनलोड करने की सोची तो केवल ५२८ केबी ही मिली. कुछ समस्या है. आपने बिट रेट को इतना कम क्यों रखा है. होना तो १२८ चाहिते परन्तु ६४ भी चलता है.

Ashok Pande said...

क्या बात है मृत्युंजय!