9/27/10

मधुप मुद्गल- कबीर


कबीर को कुमार गन्धर्व से सुनना एक अनुभव है, पर कबीर को इतने उस्तादों ने गाया है कि हर बार अलहदा व्याख्या होती चलती है. फिर अपने-अपने फ़न का भी मामला है!

आज सुनिए कुमार गन्धर्व के शिष्य रहे मधुप मुद्गल से कबीर को!

मधुप जी संगीत की एकेडमिक्स में गहरे रमे हुए हैं,सिर्फ यह कहना उनको बहुत कम करके आंकना है!उनकी आवाज़ लोक की आवाज़ के काफी नजदीक है.और मेरे हिसाब से ऐसे उस्तादों की थोड़ी कमी हुई है.

कबीर की एक 'उलटबांसी' (?) और एक पद मधुप साहब की आवाज़ में ये रहे-


1 comment:

पारूल said...

बहुत सुरीला ब्लाग ...