9/5/10

कुमार गंधर्व: अद्भुत जुगल

कुमार गन्धर्व के गायन में आप सब को 'त्रिवेणी' नाम का अल्बम याद ही होगा. सूर, कबीर और मीरा के गीतों से रचे इस संसार को गायकी के लिहाज़ से सुनना तो जबरदस्त है ही, सबसे अद्भुत है वसुंधरा कोमकली के साथ उनकी युगनद्ध आवाज़! प्रेम का यह जबरदस्त आत्मिक-व्यवहारिक आख्यान अकेले पड़ते जाने की इस दुनिया में हमें संवेदनाओं की दुनिया में ले जाता है. खासकर जब वे दोनों मीरा को गाते हैं तो देश-काल से बिंधकर हम करुणा के संसार में डुबो दिए जाते हैं.
सुनिए कुमार साहब और वसुंधरा जी का गाया हुआ मीरां का एक भजन
'पियाजी, म्हारे नैना आगे रह्यो जी'

3 comments:

DEEPAK BABA said...

आनंद ......

लेखक मंच said...

बहुत बढिया

Sanjay Joshi said...

mrityuanjay, aaj kasturi dwara sampaadit sadya praksshit kitab ke liye lamba lekh likhte hue tumhara sangeet chayan khoob saath de raha hai. shukriya bhai is adbhut maje aur ras ke liye.