10/13/10

सुनो लड़की! -तसलीमा नसरीन

सुनो लड़की!

उन्होंने कहा - आराम से...
कहा- शांत रहो...
कहा- बातें बंद...
कहा- चुप रहो...
फ़रमाया उन्होंने- बैठ जाओ...
आदेश दिया- अपना सर झुकाओ...
कहा- रोना जारी रखो, आंसुओं को बहने दो...

जवाब में तुम क्या करती हो?

अब तुम खड़ी हो जाओ
तुरंत तुमको खड़े होना चाहिए
कमर सीधी रखो
सर को ऊंचा उठाओ...
तुम्हें बोलना चाहिए
अपने ख्यालों को जोर से बोलो
चीखो!

इतनी तेज आवाज़ में चिल्लाओ कि बचने के लिए वे दौड़ पड़ें अपनी खोह में
वे कहेंगे- तुम बे-हया हो!
इसे सुनकर तुम हंसना, बस हंस देना...

वे कहेंगे- तुम कुलटा हो!
सुनना जब यह, और जोर से हंसना तुम...

तब वे कहेंगे- तुम दोषी हो!
फिर हंसना, पिछली बार से तेज़ आवाज़ में...

तुम्हारी हंसी सुन वे चिल्ला पड़ेंगे-
छिनाल हो तुम!

जब वे ऐसा कहें
अपने पीछे अपना हाथ टिकाकर,
सीधी खड़ी हो, मजबूती से
और जवाब दो- हाँ मैं हूँ, हूँ मैं छिनाल!

वे सहम जायेंगे .
वे घूरेंगे अविश्वास से,
वे इंतज़ार करेंगे कि तुम कुछ और कहो, कुछ और ...

तब उनके बीच के मर्द गुस्से और पसीने से भर जायेंगे
और औरतें,
तुम्हारी तरह छिनाल होने के सपनों में खो जायेंगी.


-तसलीमा नसरीन

6 comments:

शेखर मल्लिक said...

बहुत प्रभावशाली कविता.

Arpita said...

मन को छू लेने और मज़बूत इरादों को व्यक्त करती कविता.

मनोज पटेल said...

आत्मविश्वास से भरी कविता, शुक्रिया इसे यहाँ साझा करने के लिए |

सुनील गज्जाणी said...

behad sunder !
sadhhuwad

Anonymous said...

itne seedhe sameekaran ke bavjood itna asan hal nahi hai...shyad. kam se kam ek sadi ki ladai to yahi kahati hai.

sunilbansingh18 said...

ITS A GREAT EXPRESSION .....TASLIMA NASREEN IS ALWAYS RIGHT