10/30/10

जोगिया से प्रीत प्रीत किये दुःख होय - किशोरी आमोनकर

खूबसूरती किसे कहते हैं, यह किशोरी जी को सुन-देख कर सीखा जा सकता है. वे अपनी उपस्थिति से एक भूलती जा रही दुनिया में थाम लेने वाली आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती हैं. उनको सुनते हुए हमेशा ललक बनी रहती है कि और सुना जाये. आप खामोश हो जाते हैं और वह आवाज़ खाली मन में गहरे धंस जाती है.
यह बंदिश पुरानी तो हैं पर पर एक स्त्री का गहरा दुःख इसमें रचा-बसा है. जोगी संग जाने की आवाज़ हमारी परम्परा में प्रेम और छटपटाहट लपेटे है. मुझे एक लोकगीत याद आ रहा है जिसको आधार बना कर कवि गोरख पांडे ने कविता लिखी थी- सात सुरों में पुकारता है प्यार!
जो हो,
आइये सुनते हैं किशोरी जी से यह बंदिश - "जोगिया से प्रीत प्रीत किये दुःख होय"

3 comments:

Arpita said...

बेहतरीन बंदिश...सुनकर बहुत अच्छा लगा....

पारुल "पुखराज" said...

vaah..aabhaar

miracle5169@gmail.com said...

veerah ko AAWAAZ de rahi haiN.