12/12/10

बेगम साहिबा- ग़ालिब

मलिका-ए-ग़ज़ल अख्तरी बाई फैजाबादी उर्फ़ बेगम अख्तर, ग़ज़ल सुनाने वालों के लिए ऐसा ज़बरदस्त नाम है जिनको सुनते हुए हमेशा यह महसूस होता है की काश दुनिया की बेहतरीन गज़लें बेगम साहिबा की आवाज़ में हम सुन पायें. एक पूरी पीढी के लिए ग़ज़ल का मतलब बेगम साहिबा ही होता था, और आज भी है. ग़ज़ल हमेशा कही जाती है, पढी जाती है, लिखी नहीं जाती, इस का ऐतबार और पुख्ता हो जता है जब हम बेगम साहिबा की आवाज़ में ग़ज़ल सुनते हैं. उनकी मकबूलियत की एक झलक आप इस से हासिल कर सकते हैं-

पिछली बार जब मैं गाँव गया, जोकि आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में है, मैं अपने मोबाइल पर मेहदी हसन की गाई एक ग़ज़ल सुन रहा था. एक बुजुर्गवार बगल में बैठे थे, फरमाया, अरे ये नए लड़के (उनका इशारा मेहदी साहब की और था) भी अच्छा पढ़ते हैं. फिर क्या था, बातचीत बढ़ चली, और बेगम साहिबा के कसीदे कितनी तो देर चलते रहे. और मैं सुनता ही रहा.

सुनिए बेगम साहिबा से ग़ालिब-


1 comment:

Amiya chatterjee said...

Khak Ho jaengey hum.... UFFFFFFF