12/15/10

कुमार गन्धर्व- राग श्री- मध्य लय और तराना
















कुमार साहब से कबीर सुनना एक ज़बरदस्त अनुभव तो है ही, उनसे अन्य बंदिशें सुनना भी हमेशा ही नए, उर्जस्वित कर देने वाले अनुभवों से भर देता है. ऐसा लगता है कि एक आवाज़ है, जो इंसानी पहुँच के सभी आयामों को खोल रही है. आप उनसे कुछ भी सुनते हुए अपनी संभावनाओं के सभी दरवाजे खुला पाते हैं. वे आपको ऐसी दुनिया की और ले जाते हैं जहां शब्द अपने परिचित अर्थों के अलावा दूसरे बहुत से अर्थ भी साथ लेकर आते हैं. अपने प्रिय कवि कबीर की तरह वे भी 'सुरों के डिक्टेटर' हैं.
सुनिए उनसे राग श्री-


3 comments:

सागर said...

यह भी भेजें...सर जी... संगीत के जितने भी फाइल लगायें उसकी सी. सी. मुझे भी कर दिया करें आपका शुक्रगुजार रहूँगा.

मृत्युंजय said...

सागर भाई, आप Divshare Icon पर क्लिक करें, वहां खाता बनाएं, फिर आप सारा डाउनलोड कर सकते हैं.

रामाज्ञा शशिधर said...

बहुत खूब.आपके चुनाव का कायल हूँ.