12/23/10

तीन ठुमरियां - बेगम अख्तर, गिरिजा देवी और छन्नूलाल मिश्र

ठुमरी का अर्थ बताते हुए पंडित छन्नूलाल मिश्र बताते हैं की ठुमरी वह जहां ठुमक हो. आम तौर पर ठुमरी स्त्रियों का गायन मानी जाती रही है. प्रेम की अभिव्यक्ति का माध्यम. नृत्य के साथ इस विधा का गहरा रिश्ता है. नृत्य के साथ की ठुमरी को बोल बाँट की ठुमरी, और सिर्फ गायकी को बोल बाँट की ठुमरी के नाम से जानते हैं.
वाजिद अली शाह का नाम आपने सिर्फ एक ऐयाश बादशाह के रूप में ही जाना हो तो आप उस व्यक्तित्व की एक बड़ी खूबी से अछूते हैं. वाजिद अली शाह को ही ठुमरी के आविष्कार का श्रेय जाता है, या कम से कम यह तो कह ही सकते हैं कि उन्हीं के समय में ठुमरी की पहचान विधा के रूप में हुई.

आज सुनिए तीन बड़े उस्तादों से ठुमरी-



5 comments:

सागर said...

Maza aa gaya sir... pehli waali to kaamal ki hai

सागर said...

dusra to kohbar jaisa lag raha hai... hamare gaon mein gaaya jata hai... aapse request hai aise file jab bhi lagayen... MP3 format mail kar diya karen

मनोज पटेल said...

मज़ा आ गया पार्टनर.......
और....और...

sidheshwer said...

आनंदम!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Amiya chatterjee said...

" Ami ak Jajabar"
Jajabar's dont get stuck anywhere you know that my friend.
Hope You are not stuck with the ultimate feelings of love of THUMARI.
Thanks for posting . LET GO .....LET GO