1/7/11

बिनायक सेन के पक्ष में- प्रतिरोध आन्दोलन

हम लड़ेंगें साथी...

बिनायक सेन के पक्ष में बिहार में जन संस्कृति मंच (जसम) सडकों पर उतरा

सुप्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और चिकित्सक डॉक्टर विनायक सेन की रिहाई की मांग के समर्थन में बिहार में जन संस्कृति मंच की पटना, बेगूसराय और समस्तीपुर इकाइयों ने अन्य लोकतान्त्रिक संगठनों के साथ मिलकर सडकों पर उतर कर आवाज़ बुलंद की है.

26 दिसंबर को जसम, हिरावल और AISA ने मिलकर पटना के बी एन कॉलेज गेट से प्रतिरोध मार्च निकाला, जो शहीद भगत सिंह चौक पर पहुँच कर सभा में तब्दील हो गया. जसम के पूर्व महासचिव और कवि महेश्वर के स्मृति-दिवस को 'दमन विरोधी दिवस' के रूप में मनाते हुए उपरोक्त मार्च निकाला गया. मार्च का नेतृत्व जसम के राज्य सचिव संतोष झा, हिरावल की समता, AISA बिहार के संयुक्त सचिव परवेज़, मार्कंडेय, राहुल, इफ़्तेख़ार, हिमांशु, मुशर्रफ आदि कर रहे थे. वक्ताओं ने कहा कि देश में लोकतंत्र का प्रश्न फिर से एक प्रमुख प्रश्न बन गया है. डॉक्टर सेन को दी गयी उम्र क़ैद की सज़ा देश भर में लोकतान्त्रिक आवाजों का दमन करने की सरकारी साजिशों का हिस्सा है. डॉक्टर सेन को फ़ौरन रिहा करने की जोरदार मांग करते हुए उन्होंने बिहार में पिछले दिनों संपन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत और भाजपाइयों द्वारा इसे हिंदुत्व की जीत बताये जाने की याद दिलाते हुए लोगों से इन सांप्रदायिक फासीवादी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की भी अपील की. विदित हो कि छत्तीसगढ़ में भी भाजपा कि हुकूमत है, जहाँ डॉक्टर सेन को सज़ा सुनाई गयी है.

30 दिसम्बर को बेगूसराय में जसम, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, फैक्ट, नटकिया, आशीर्वाद संगठनों की तरफ से रामधारी सिंह दिनकर चौक से शहीद चौक तक कैंडिल मार्च निकाला गया. बैनर पर 'प्रोटेस्ट अगेंस्ट कंविक्सन ऑफ़ डॉ विनायक सेन' लिखा हुआ था. इस मार्च का नेतृत्व जसम के राज्य उपाध्यक्ष दीपक सिन्हा, जलेस के जिला अध्यक्ष भगवान प्रसाद सिन्हा, रंगकर्मी प्रवीण कुमार गुंजन, आर टी राजन, दीनानाथ, अविनाश अशेष, अभिजीत आदि कर रहे थे.

1 जनवरी 2011 को समस्तीपुर में जसम, इंकलाबी नौजवान सभा और आइसा ने 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकाला. यह मार्च रंगकर्मी सफ़दर हाशमी के शहादत दिवस पर लेनिन आश्रम से निकल कर शहर के प्रमुख मार्गों से गुज़रते हुए शहीद भगत सिंह चौक पर पहुंचा. 'डॉक्टर विनायक सेन को ससम्मान रिहा करो', 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन बंद करो', 'तमाम काले कानून रद्द करो' आदि नारे लगाते हुए एक सौ से अधिक लोगों ने जुलूस में हिस्सा लिया. चौक पर पहुंचकर जुलूस सभा में परवर्तित हो गयी. सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर सुरेन्द्र प्रसाद ने की. प्रमुख वक्ताओं में जसम के जिला अध्यक्ष और 'समकालीन चुनौती' के संपादक प्रोफ़ेसर सुरेन्द्र सुमन, इनौस के जिला सचिव सुरेन्द्र कुमार सिंह, आइसा के जिला संयोजक अर्विन्दानंद, डॉक्टर खुर्शीद, प्रोफ़ेसर उमेश कुमार, फूलबाबू सिंह, कृष्ण बालक महतो आदि थे.

लखनऊ में प्रदर्शन कर लेखकों व संस्कृतिकर्मियों ने जताया विरोध

लखनऊ, 2 जनवरी। छतीसगढ़ की निचली अदालत द्वारा विख्यात मानवाधिकारवादी व जनचिकित्सक विनायक सेन को दिये उम्रकैद की सजा के खिलाफ तथा उनकी रिहाई की माँग को लेकर जन संस्कृति मंच की ओर से आज शहीद स्मारक पर विरोध प्रदर्शन व सभा का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से लखनऊ के लेखकों, संस्कृतिकर्मियों, नागरिक अधिकार व जन आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विनायक सेन की सजा पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह का फैसला हमारे बचे.खुचे जनतंत्र का गला घोटना है, यह नागरिक आजादी और लोकतंत्र पर हमला है। इसलिए विनायक सेन की रिहाई का आंदोलन लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष है।

प्रदर्शनकारी लेखकों व कलाकारों के हाथों में प्ले कार्ड्स थे जिनमें सीखचों में बन्द विनायक सेन की तस्वारें थीं और उन पर लिखा था ‘कारपोरेट पूँजी का खेल, विनायक सेन को भेजे जेल’, ‘विनायक सेन को रिहा करो’ आदि। इस अवसर पर कलाकारों ने शंकर शैलेन्द्र का गीत ‘भगत सिंह इस बार न लेना काया भारतवासी की, देशभ्क्ति के लिए आज भी सजा मिलेगी फाँसी की’ और दुष्यन्त की गजल ‘हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए’ गाकर अपना विरोध जताया।

जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से माँग की गई कि विनायक सेन को रिहा किया जाय, आपरेशन ग्रीनहंट व सलवा जुडुम को बन्द किया जाय, छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा कानून और इसी तरह के अन्य जन विरोधी कानूनों को खत्म किया जाय और इन्हीं कानूनों के तहत उम्रकैद की सजा पाये नारायण सन्याल और पीयुष गुहा को रिहा किया जाय।

इस विरोध प्रदर्शन में जनवादी लेखक संघ, एपवा, पी यू सी एल, इंकलाबी नौजवान सभा, अलग दुनिया, आइसा, दिशा, जन कलाकार परिषद, अमुक आर्टिस्ट ग्रुप व आवाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर हुई विरोध सभा को रामजी राय, अजय सिंह, शिवमूर्ति, ताहिरा हसन, गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव, रमेश दीक्षित, सुभाष चन्द्र कुशवाहा, राजेश कुमार, कल्पना पाण्डेय, के0 के0 पाण्डेय, भगवान स्वरूप कटियार, चन्द्रेश्वर, वंदना मिश्र, के0 के0 वत्स, बी0 एन0 गौड़, सुरेश पंजम, प्रतिभा कटयार, आदियोग, बालमुकुन्द धूरिया, अनिल मिश्र ‘गुरूजी’, विमला किशोर, जानकी प्रसाद गौड़, के0 के0 शुक्ला, महेश, विपिन त्रिपाठी आदि ने सम्बोधित किया। सभा का संचालन जसम के संयोजक कौशल किशोर ने किया।

वक्ताओं ने कहा कि जिन कानूनों के आधार पर विनायक सेन को सजा दी गई है, वे कानून ही कानून की बुनियाद के खिलाफ हैं। इनमें कई कानून अंग्रेजों के बनाये हैं जिनका उद्देश्य ही आजादी के आंदोलन को कुचलना था। आज उन्हीं कानूनों तथा छत्तीसगढ़ में लागू दमनकारी कानूनों का सहारा लेकर विनायक सेन पर राजद्रोह व राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप लगाया गया है और इसके आधार पर उन्हें सजा दी गई है। गौरतलब है कि अपने आरोपों के पक्ष में पुलिस द्वारा जो साक्ष्य पेश किये गये, वे गढ़े हुए थे और अपने आरोपों को सिद्ध कर पाने वह असफल रही है। अगर इन आरोपों को आधार बना दिया जाय तो लोकतांत्रिक विरोध की हर आवाज पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया जा सकता है।

वक्ताओं ने इस बात पर गहरी चिन्ता व्यक्त की कि न्यायालयों के फैसले भी राजनीतिक होने लगे हैं। भोपाल गैस काँड और अयोध्या के सम्बन्ध में आये कोर्ट के फैसले ने न्यायपालिका के चेहरे का पर्दाफाश कर दिया है। विनायक सेन के सम्बन्ध में आया फैसला नजीर बन सकता है जिसके आधार पर विरोध की आवाज को दबाया जायेगा। अरुंघती राय पर भी इसी तरह की धारायें लगाकर मुकदमा दर्ज किया गया है। इस प्रदेश में भी सामाजिक कार्यकर्ता सीमा आजाद को एक साल से जेल में बन्द रखा गया है।

वक्ताओं का कहना था कि जब भ्रष्टाचारी, घोटालेबाज, माफिया व अपराधी सरकार को सुशोभित कर रहे हों वहाँ आदिवासियों, जनजातियों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने तथा सलवा जुडुम से लेकर सरकार के जनविरोधी कार्यों का विरोध करने वाले बिनायक सेन पर दमनकारी कानून का सहारा लेकर आजीवन कारावास की सजा देने का एक मात्र मकसद जनता के प्रतिरोध की आवाज को कुचल देना है। इसीलिए आज विनायक सेन प्रतिरोध की संस्कृति और इंसाफ व लोकतंत्र की लड़ाई के प्रतीक बन गये हैं।

जसम के इस प्रदर्शन के माध्यम से यह घोषणा भी की गई कि डा0 विनायक सेन की रिहाई के लिए विभिन्न संगठनो को लेकर रिहाई समिति बनाई जायेगी तथा यह समिति विविध आंदोलनात्क कार्यक्रमों के द्वारा जनमत तैयार करेगी।


विनायक सेन की रिहाई के लिए धरना, 10 को होगा प्रदर्शन

2 जनवरी ,गोरखपुर। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बाल चिकित्सक विनायक सेन की रिहाई की माँग करते हुए शहर के सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने रविवार को टाउनहाल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना दिया। जन संस्कृति मंच, पीपुल्स यूनियन फार ह्यूमन राइट्स (पीयूएचआर) और इंकलाबी नौजवान सभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धरने में शामिल लोगों ने कहा कि डा विनायक सेन को देशद्रोह के आरोप में आजीवन कारावास की सजा देना लोकतंत्र को उम्रकैद देना है। इस मौके पर 10 जनवरी को डा विनायक सेन की रिहाई की माँग को लेकर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई।
धरने में वरिष्ठ कवि एवं गीतकार देवेन्द्र आर्य, भाकपा माले के जिला सचिव राजेश साहनी, जनसंस्कृति मंच के संयोजक अशोक चौधरी, संस्कृति कर्मी रामू सिद्धार्थ, गोरखपुर फिल्म सोसाइटी के संयोजक एवं पीयूएचआर के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, असीम सत्यदेव, डा संध्या, आनंद, शिवनंदन, मजदूर नेता तपिश मैंदोला, पीयूएचआर के जिला सचिव श्याममिलन एडवोकेट, सामाजिक कार्यकर्ता उत्कर्ष सिन्हा, प्रमोद कुमार, सुधीर, अमोल राय, नितेन अग्रवाल, अरविन्द कुमार, अशोक निषाद, दीनदयाल यादव, बैजनाथ मिश्र, अब्दुल कलाम आदि शामिल हुए। पीपुल्स फोरम के संयोजक प्रो रामकृष्ण मणि अस्वस्थ होने के कारण धरने में शामिल नहीं हो पाए लेकिन उन्होंने धरने का समर्थन करते हुए कहा छत्त्तीसगढ़ सरकार ने साजिश कर डा विनायक सेन को जेल में डालने का काम किया है। धरने में शामिल लोगों ने देश में प्राकृतिक संसाधनों की लूट और आदिवासियों की बेदखली की चर्चा करते हुए कहा कि इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को सत्ता दमन कर रही है। डा विनायक सेन को उम्र कैद की सजा उन सभी लोगों को चेतावनी है जो कार्पोरेट लूट के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने विनायक सेन को इसलिए जेल के सींखचों के पीछे किया क्योंकि उन्होंने सलवा जुडूम के अत्याचारों को उजागर किया था।



बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान समारोह में बिनायक सेन के पक्ष में पारित प्रस्ताव
बनारस प्रसाद भोजपुरी सम्मान समारोह (26 दिसंबर 2010 पटना, बिहार) में मौजूद हम सभी साहित्यकार-संस्कृतिकर्मी, पत्रकार-बुद्धिजीवी छत्तीसगढ़ सेशन कोर्ट की ओर से प्रसिद्ध चिकित्सक और मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने की घटना पर गहरी चिंता जाहिर करते हैं और इसे देश के लोकतंत्र के लिए गंभीर संकट के बतौर चिह्नित करते हैं।
विनायक सेन चिकित्सा के क्षेत्र में जनसेवा के लिए चर्चित रहे हैं। एक लोकतंत्र जिन लोककल्याणकारी परंपराओं से मजबूत होता है, उसको ऊर्जा देने वाली शख्सियत के रूप में विनायक सेन मशहूर रहे हैं।
इसके पहले जब राजनैतिक दुराग्रहवश छत्तीसगढ़ सरकार ने उन पर ‘राजद्रोह’ का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद किया था, तब भी देश के लोकतंत्रपसंद एवं न्यायपसंद लोगों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विद्वानों समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान उनकी रिहाई के पक्ष में खड़े हुए। इसी जनदबाव में उन्हें जमानत मिल पाई।
अब सेशन कोर्ट ने विनायक सेन को जो सजा दी है, वह उचित प्रतीत नहीं होती। हम न्यायालय से वास्तविक न्याय की अपेक्षा करते हैं और लोकतंत्रपसंद-इंसाफपंसद लोगों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि वे न्याय और लोकतांत्रिक अधिकार के पक्ष में संगठित हों। विनायक सेन को इंसाफ दिलाने के लिए एकजुट हों।

हस्ताक्षरकर्ता-
आलोकधन्वा,नरेश सक्सेना,खगेंद्र ठाकुर,विजेंद्र नारायण सिंह,शांति सुमन,नचिकेता,रामनिहाल गुंजन,रविभूषण,रेवती रमण,
सुधीर सुमन,अरविंद कुमार,पूनम सिंह,संतोष झा,नवीन,अशोक गुप्त,सुमन कुमार सिंह,संतोष श्रेयांस,अरुण शीतांश,हरेंद्र प्रसाद सिन्हा,रवि घोष,युगल किशोर प्रसाद


रायपुर में प्रदर्शन
रायपुर। बिनायक सेन और दो अन्य लोगों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा के विरोध में आदिवासियों द्वारा दो से आठ जनवरी तक मनाए जा रहे विरोध सप्ताह के दूसरे दिन भी छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्रों में जनजीवन बाधित हुआ। अदालत ने 24 दिसम्बर को सेन, नक्सलियों की विचारधारा के समर्थक नारायण सान्याल और कोलकाता के व्यवसायी पीयूष गुहा को राजद्रोह का दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के चलते लौह अयस्क की ढुलाई तथा दंतेवाड़ा जिले के बैलाडिला में खनन कार्य भी प्रभावित हुआ।

बस्तर क्षेत्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में हालांकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, इस के बावजूद लोग घरों से बाहर बहुत कम निकल रहे हैं। दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में वाहन नहीं चल रहे हैं। बस्तर क्षेत्र के पांच जिलों नारायणपुर, कांकेर, बस्तर, बीजापुर और दंतेवाड़ा के दूरदराज वाले इलाकों में दर्जनभर सड़कों को अवरूद्ध कर दिया गया. विरोध प्रदर्शन का असर देश की लौह अयस्क उत्पादक कम्पनी एनएमडीसी लिमिटेड पर भी पड़ा है। कम्पनी की माल ढुलाई कम से कम 20 फीसदी तक प्रभावित हुई है। कम्पनी के एक अधिकारी के मुताबिक माल की ढुलाई दिन में तो नहीं प्रभावित हुई लेकिन रात में रेलवे द्वारा अपने रैकस वापस ले लिए जाने से ढुलाई प्रभावित हो रही है।

3 comments:

आशुतोष कुमार said...

mashal se mashal jalate chalo
*

ज़िन्दां (जेल) से एक ख़त



‘मेरी जां तुझ को बतलाऊं बहुत नाज़ुक ये: नुक्ता (भेद) है

बदल जाता है इन्सां जब मकां उस का बदलता है

मुझे ज़िन्दां में प्यार आने लगा है अपने ख़्वाबों पर

...जो शब को नींद अपने मेहरबां हाथों से

वा करती है दर उसका

तो आ गिरती है हर दीवार उसकी मेरे क़दमों पर

मैं ऐसे ग़र्क़ हो जाता हूं इस दम अपने ख़्वाबों में

के: जैसे इक किरन ठहरे हु...ए पानी पे: गिरती है

मैं इन लम्हों में कितना सरख़ुश-ओ- दिलशाद (प्रसन्नचित) फिरता हूं

जहां की जगमगाती वुस्अतों (विस्तार) में किस क़दर आज़ाद फिरता हूं

जहां दर्द-ओ-अलम का नाम है कोई न: ज़िन्दां है

"तो फिर बेदार होना (जागना) किस क़दर तुम पर गरां (भारी) होगा"

नहीं ऐसा नहीं है मेरी जां मेरा ये: क़िस्सा है

मैं अपने अज्म (संकल्प)-ओ-हिम्मत से

वही कुछ बख्शता हूं नींद को जो उसका हिस्सा है'




नाज़िम हिकमत (तुर्की कवि), अनुवाद: फैज़ अहमद फैज़

shesnath pandey said...

विनायक को लेकर जो देश भर में चल रहा है उससे अवगत कराने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.........

नया सवेरा said...

... gambheer maslaa !!