1/10/11

द पीपुल यूनाईटेड शैल आलवेज बी विक्टोरिअस !

बिनायक सेन के पक्ष में कुछ और रपटें

बनारस में प्रतिरोध
डा. बिनायक सेन की गिरफ्तारी का बनारस में विरोध छत्तीसगढ़ न्यायालय द्वारा मनवाधिकार कार्यकर्ता और पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के उपाध्यक्ष डाक्टर बिनायक सेन को देशद्रोही बताने और आजीवन कारावास की सजा सुनाने के विरोध में वाराणसी के बुद्धिजीवियों ने 31 दिसंबर, 2010 को मौन जुलूस निकाला। जुलूस में जन संस्कृति मंच, ऐपवा, आइसा और भाकपा (माले) ने भी भागेदारी की। बीएचयू गेट से प्रारम्भ होकर दशाश्वमेध घाट तक निकले इस जुलूस में सौ से अधिक संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यकारों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। घाट पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आज मानवाधिकारों के लिये आवाज उठाने वाले लोगों के लिये सांस लेने के लिये भी जगह नहीं बची है। वक्ताओं ने यह
भी कहा कि करोड़ो रुपयों के घोटालेबाजों पर सरकार और न्यायालय अकुंश नहीं लगा पा रही है लेकिन आदिवासी क्षेत्र में लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिये समर्पित डा. सेन जैसे लोगों को देशद्रोही सिद्ध करके यह चेतावनी देना चाह रही है कि जो भी सत्ता के विरुद्ध देश की खुशहाली व जनता के वाजिब हक के लिये आवाज उठायेंगे उन सभी के साथ डा. बिनायक सेन जैसा ही हस्र होगा। सभा में वक्ताओं ने एक हस्ताक्षर पत्र भी राष्ट्रपति को प्रेषित किया जिसमें डा. बिनायक सेन को तत्काल रिहा करने की मांग की गई हैं।
सभा को प्रो. दीपक मलिक, साहित्यकार काशीनाथ सिंह, पीयूसीएल के चितरंजन सिंह, जन संस्कृति मंच के प्रो. बलराज पांडे, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. रामाज्ञा राय, डा. ताबिर कलाम, डा. ध्रुव, डा. बिंदा परांजये, डा. रीना सैटिन,
डा. ए.के. मुखर्जी, आइसा से शिखा, विशाल विक्रम, ऐपवा से कुसुम वर्मा, भाकपा माले के शहर सचिव का. मनीष शर्मा, का. नरेंद्र पांडे ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन का. प्रशांत ने किया। जुलूस को 'बिनायक सेन देशद्रोही
नहीं!' , 'घोटालेबाजों का खुला खेल, दंगाईयों पर कानून फेल, बिनायक सेन को जेल?' सरीखे लाल पोस्टरों ने सड़क पर निकले जुलूस को सर्वसाधारण के लिये आकर्षित बना दिया था।

कुसुम वर्मा

बिनायक सेन को अन्यायपूर्ण सजा के खिलाफ संसद मार्ग पर
नागरिक-प्रतिरोध, दिल्ली
27 दिसंबर को दिल्ली में जंतर मंतर पर एकत्र सैकड़ों लोगों ने डॉ विनायक सेन के लिए आजीवन कारावास की सजा के हाल के फैसले पर आक्रोश व्यक्त करने से लिए जंतर मंतर पर एकत्रित हुए. प्रदर्शनकारियों में छात्रों, कामगारों, नागरिक 'स्वतंत्रता समूहों, महिला समूहों सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने जंतर मंतर से संसद मार्ग तक प्रतिवाद मार्च निकाला. बिनायक सेना को सुनाई गई अन्यायपूर्ण सजा के खिलाफ नारे लगाते हुए जुलूस संसद मार्ग पहुँच कर एक विरोध सभा में तब्दील हो गया.
यह विरोध-प्रदर्शन AISA और AIPWA द्वारा संयुक्त रूप से PUCL, PUDR और अन्य मानव अधिकारों और लोकतांत्रिक समूहों के साथ मिलकर आयोजित किया गया .AISA ने 27 दिसंबर के ही दिन डॉ विनायक सेन की सजा के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था जो इलाहाबाद, बनारस, पटना, कोलकाता, हजारीबाग,बगोदर सहित कई अन्य स्थानों पर सफलातापुर्वाका आयोजित किया गया.
दिल्ली में विरोध के आह्वान को जीवन के सभी क्षेत्रों से आनेवाले लोगों का भारी समर्थाना मिला.जो कि इस सवाल परअपने सदमे और गुस्से के इज़हार को इच्छुक थे. जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, और जामिया मिलिया इस्लामिया से AISA के बैनर तले छात्र प्रदर्शनकारियों की बड़ी तादाद थी और अच्छी खासी संख्या में भाकपा (माले ) के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल थे. इस विराट प्रतिवाद सभा का सञ्चालन AIPWA की कविता कृष्णन करा रही थीं जिसे बुज़ुर्ग पत्रकार ओर मानवाधिकार नेता कुलदीप नैयर, इतिहासकार प्रोफेसर हरबंस मुखिया ,लेखिका अरुंधति रॉय, स्वामी अग्निवेश, जन संस्कृति मंच, दिल्ली के अध्यक्ष, कवि मंगलेश डबराल, डा. मीरा शिव, जेएनयू के प्रोफेसर के. जे मुखर्जी, PUDR के गौतम नवलखा, समाजकर्मी हर्ष मंदर,सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के केन्द्रीय समिति सदस्य प्रभात कुमार, AISA के महासचिव रवि राय के साथ साथ PUCL, राष्ट्रीय वन श्रमिक फोरम, नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधियों सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने संबोधित किया और लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए संयुक्त पहल को ज़रूरी बताया.
विरोध सभा को संबोधित करते हुए प्रतिभागियों ने रेखांकित किया कि रायपुर सत्र अदालत द्वारा राजद्रोह के आरोप में सजा डॉ विनायक सेन,नारायण सान्याल और पीयूष गुहा को आजीवन कैद की सज़ा के फैसले से हर कहीं लोकतांत्रिक जनमत को सदमा पहुंचा है. पूरे मुकदमे के दौरान, साक्ष्य के अभाव में फर्जी साक्ष्य गढ़े गए और सरकार की ओर से दलीलों के नाम पर महज एक स्वांग रचाया गया. सबूतों की जब्ती में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के थोक उल्लंघन को अदालत ने नजरअंदाज किया. इतने सतही , निराधार और मनगढ़ंत सबूतों के आधार पर दी गयी सजा न्याय का गम्भीर उल्लंघन और लोकतंत्र के लिए एक झटका है.
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह फैसला सिर्फ बिनायक सेन के खिलाफ ही नहीं , बल्कि सभी विरोध और असंतोष की आवाजों को, राज्य दमन, कारपोरेट लूट तथा और भूमि हड़पने की आलोचना कर रहे तमाम सार्वजनिक बुद्धिजीवियों को भयभीत करने और खामोश करने की एक सुचिंतित चाल है. विरोध में भाग लेने को कहा, "अगर डॉ विनायक सेन के मामले की तरह के बहुचर्चित मामले की यह नियति है तो हम केवल कल्पना कर सकते हैं कि उन आम किसानों, आदिवासियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मजदूरों के सैकड़ों की तादाद में चलनेवाले अदालती मामलों का क्या हश्र होता होगा , जो असंतोष और विरोध की आवाज़ बुलंद करके, जन- आंदोलनों को संगठित करके , ऑपरेशन ग्रीन हंट को चुनौती देकर राजसता का कोपभाजन बन रहे हैं. "
प्रदर्शनकारियों ने उसी दिन रायपुर में एक और सत्र न्यायालय द्वारा भी "A World to win" के प्रकाशक असित सेन गुप्ता को उनके पास से बरामद कथित "प्रतिबंधित साहित्य " के लिए 11 साल की सजा सुनाए जाने पर भी गम्भीर चिंता व्यक्त की. इस मामले और इसी तरह के दूसरे मामलों में "प्रतिबंधित साहित्य" में मार्क्स की 'दास कैपिटल', कम्युनिस्ट घोषणापत्र, और अंबेडकर तथा भगत सिंह के साहित्य सरकार और अदालत की निगाह में प्रतिबंधित माने गए हैं.
सभा ने बिनायक सेन की रिहाई के लिए लगातार संघर्ष चलाए रखने का संकल्प लिया.साथ ही साथ छत्तीसगढ़ और दूसरी जगहों में विरोधी स्वरों को खामोश करने और फर्जी मामलों में फंसाए जाने की हर वारदात के खिलाफ संघर्ष जारी रखने, छत्तीसगढ़ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, UAPA और AFSPA जैसे काले कानूनो को समाप्त कराने के लिए संघर्ष के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की.

बिनायक सेन के पक्ष में इलाहाबाद में प्रदर्शन, इलाहाबाद.
मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन क़ी गिरफ्तारी और आजीवन कारावास क़ी सज़ा से क्षुब्ध होकर शहर के छात्र युवा और सामाजिक सांस्कृतिक संगठनो के कार्यकर्ताओं ने सोमवार दोपहर असहमति दिवस मनाते हुए प्रदर्शन किया. महात्मा गांधी मार्ग के सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान संस्कृतिकर्मियों, छात्रों, वकीलों, और मजदूर के संगठन के लोगों ने ' कार्पोरेट पूंजी का देखो खेल, बिनायक सेन को भेजे जेल!, बिनायक सेन क़ी गिरफ्तारी और सज़ा को रद्द करो!, लोकतंत्र का दमन हम नहीं सहेंगे!, आदि नारे लगा रहे थे.
असहमति सभा में वक्ताओं ने कहा क़ि बिनायक सेन क़ी गिरफ्तारी अभिव्यक्ति क़ी आज़ादी और नागरिक अधिकारों पर कुठाराघात है. भू संपदा से भरे छत्तीसगढ़ जैसे राज्य कारपोरेट और सरकारी लूट के गढ़ बने हैं. आदिवासियों का विस्थापन, वनों का विनाश और जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं.
इस प्रदर्शन में आल इंडिया स्टुडेंट्स एसोसिएशन , शहरी गरीब मोर्चा, जान संसकृति मंच, स्त्री अधिकार संगठन, आज़ादी बचाओ आन्दोलन, पी यू एच आर, ए आई सी सी टी यू आदि संगठन शामिल थे. बनवारी लाल शर्मा, जिया उल हक़, सुधीर सिंह, के के पाण्डेय, अंशु मालवीय, विश्वंभर पटेल, कृष्ण मुरारी, रामायन राम, डी मंडल, अली अहमद फातमी, दूधनाथ सिंह, पद्मा सिंह, ज़फर बख्त, कमल उसरी, आलोक राय, संतोष मिश्रा, रमेश यादव, उत्पला, सुप्रिया, सुब्रत, सतीराम और अनिल सहित बड़ी तादात में लोगों ने इस कार्यक्रम में शिरकत क़ी.

उदयपुर, राज़स्थान में बिनायक सेन के समर्थन में प्रदर्शन
मानवाधिकार कार्यकर्ता, समर्पित चिकित्सक और पी.यूं.सी.एल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, डॉ. बिनायक सेन को राजद्रोह के आरोप में छत्तीसगढ़ सेशंस न्यायालय द्वारा आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाये जाने के विरोध में आज पी. यू. सी.एल., उदयपुर द्वारा एक सभा का आयोजन किया गया. सभा में वक्ताओं ने न्यायिक प्रक्रिया के खोखलेपन पर प्रहार करते हुए छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम जैसे काले क़ानून को फ़ौरन रद्द करने और डॉ. सेन को अविलंब उचित न्याय दिलाने की मांग की.
पी.यू.सी.एल., उदयपुर की अध्यक्ष श्रीमती चन्द्रा भंडारी ने कहा कि आज मानवाधिकारों के हनन की पराकाष्ठा को देखाकर प्रतीत होता है कि दूसरी आजादी के लिए लड़ाई लड़ने का वक्त आ गया है. सेवा मंदिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री नीलिमा खेतान ने कहा कि बिनायक सेन को प्रतीक बनाकर छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम जैसे दमनकारी कानूनों के विरुद्ध जनचेतना जागृत की जानी चाहिए. वरिष्ठ अधिवक्ता श्री. रमेश नंदवाना ने कहा, कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया संदेह के घेरे में है. राजस्थान में न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया में रिश्वत के आरोप लग रहे हैं. सी.पी. आय. के पूर्व विधायक कॉ. मेघराज तावड़ ने कहा कि इस दमन के खिलाफ सभी को संगठित होकर व्यवस्था पर चोट करनी होगी.
सी. पी एम्. के राज्य सचिव कॉ. बंसीलाल सिंघवी ने कहा कि पहले अयोध्या और अब बिनायक सेन - ये दोनों ही फैसले राज्य सत्ता के असली चरित्र को उजागर करते हैं. मीडिया और न्यायलय दोनों ही इस दमन तंत्र के पुर्जे बनकर आ रहे हैं. जनता दल (से.) के अर्जुन देथा ने कहा कि यह फैसला दरअसल सरकार द्वारा एक तरह की चेतावनी है कि जो भी जनता के बीच रहकर जन अधिकारों की बात करेगा, उसका यही हश्र किया जायेगा. प्रसिद्द चिन्तक और कवि श्री नन्द चतुर्वेदी ने कहा कि राज्य का ऐसा ही क्रूर चरित्र है .राज्यसत्ता के ऐसे ही चरित्र के कारण गांधी अराजकतावादी थे . विद्या भवन सन्दर्भ केंद्र के निदेशक श्री. हृदयकांत दीवान ने कहा कि आज अगर महात्मा गांधी जीवित होते तो राज्यसत्ता द्वारा माओवादी करार दिए जाते. जागरुक युवा संघटन के कॉ. डी. एस. पालीवाल ने कहा कि असली खतरा माओवाद नहीं बल्कि खनन माफिया है जिसके इशारे पर राज्यतंत्र जन अधिकारों की आवाज बुलंद करने वालों के दमन कर रहा है. आस्था संस्थान के श्री अश्विनी पालीवाल ने कहा कि राजस्थान में भी आदिवासियों से जल, जंगल जमीन हड़प लेने का खेल चल रहा है.
पी.यू.सी.एल., उदयपुर के श्रीराम आर्य ने सभी द्वारा इसके विरुद्ध साझे विरोध प्रदर्शन की बात रखी. अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन की श्रीमती सुधा चौधरी ने कहा कि इसके विरुद्ध रैली निकाली जानी चाहिए जिसमें उनका संगठन शामिल होगा .उपस्थित सभी व्यक्तियों और सगठनों ने इन दोनों वक्ताओं की बात का पुरजोर समर्थन किया. आस्था की श्रीमती जिनी श्रीवास्तव ने कहा कि दुनिया भर में इस के विरुद्ध प्रदर्शन हो रहे हैं और उदयपुर को भी इसमें अपनी आवाज़ मिलानी चाहिए.
सभा में सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने बिनायक सेन को जन्मदिन की बधाई देते हुए केंद्रीय कारागार, रायपुर के पते पर उनके समर्थन में पोस्टकार्ड लिखे. ज्ञातव्य है कि ४ जनवरी को डॉ.सेन का जन्मदिन है. सभा में इस मुद्दे से सम्बंधित अनिल मिश्रा और प्रणय कृष्ण के आलेख भी वितरित किये गए और हिमांशु पंड्या ने इलाहाबाद के कवि मृत्युंजय की कविता 'बीर बिनायक बांके दोस्त' का पाठ भी किया. सभा में बड़ी संख्या में अन्य नागरिकों, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों की भी भागीदारी रही.
सभा का संचालन कर रहे पी.यूं.सी.एल., उदयपुर के उपाध्यक्ष अरुण व्यास ने आव्हान किया कि नागरिकों एवं संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले विरोध मार्च में सभी अधिक से अधिक संख्या में भाग लें .