1/11/11

शंकर-शंभू - कव्वाली

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर की दरगाह पर हर साल उर्स में ये दोनों कलाकार कव्वाली गाया करते थे.
हिन्दुस्तानी तहजीब के साझेपन की इससे मज़बूत मिसाल क्या होगी!
इसी शंकर-शम्भू की जोड़ी से सुनिए ये कव्वाली -

आज रंग है री...

6 comments:

Neeraj Rohilla said...

मृत्युंजय जी,
इस कव्वाली के लिये बहुत आभार, शंकर-शम्भू की जोडी से एक और कव्वाली सुनने के लिये इधर का रूख करें ।
http://antardhwani.blogspot.com/2009/05/blog-post_25.html

आभार,
नीरज

मृत्युंजय said...

shukriya neeraj bhaaee!

tripsde said...
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tripsde said...

bhai mritunjay, inki ek aur qawali "chhap tilak" agar kahi mile toh share kijiye.
iske liye dhanyawad.
aur kaho? kaha ho aur kya chal raha hai?
kabhi baat ho...
devraj tripathi

RSTV said...
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इरफ़ान said...

Bahut sundar.