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त्रिवेणी (कबीर, सूर, मीरा) - कुमार गन्धर्व, वसुंधरा कोमकली
















निरभय निरगुन गुन रे गाऊँगा (कबीर)
पिया जी म्हारे नैनां आगे रह्यो जी (मीरा)
एक घरी नैन घट घट्टन (सूर)



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