1/21/11

मीरा - उस्ताद राशिद खान

मीरा की कविता विरह की बेलि है. स्त्री के दुःख की इतनी पुरानी और ठीक उतनी ही नयी अभिव्यक्ति. मध्यकाल के धर्म के आवरणों में लिपटी यह अनूठी कविता मन की सबसे गहरी परतों को बेध देती है. प्रिय से बिछोह का गहन दुःख मीरा की में टीसता रहता है.'सूली ऊपर सेज पिया की केहि विधि मिलना होय' लिखने वाली मीरा के भावों की सही अभिव्यक्ति राशिद खान के इस गायन में मौजूद है.

सुनिए उस्ताद राशिद खान से मीरा का यह भजन राग भैरवी में -
कोई कहियो रे प्रभु आवन की, आवन की मनभावन की...