1/22/11

परवल गाथा - प्रकाश उदय



(प्रकाश उदय भोजपुरी के बड़े रचनाकार हैं. आज पढ़िए उनका यह गीत जो परवल की जिन्दगी, उसके बारे में लोगों के बदलते रुख और बाज़ार में उसकी आमदरफ्त के साथ ही अवाम की जिन्दगी में परवल की घटती-बढ़ती खासियत की रोचक कथा बयां करती है. ठेठ भोजपुरी के कुछ शब्दों के अर्थ नीचे दिए गए हैं.)


परवल गाथा

आजु सट्टी में पहिल पहिल लउकल परोरा, हरियाइ गइल बा
देख परवर नयन से लखत चहुँओर, हरियाइ गइल बा

अभी कुछ दिन त टुकुर-टुकुर ताके के बा
फेरू कबो-कबो भाव-ताव थाहे के बा
अब तनी-तनी परस सरस होखे लागल
अब तुरहो जियत तनी जोखे लागल

अब तियना से भुजिया ले पहुँचल परोरा पटियाइ गइल बा
अब गवना बियाह तिलक थम्हलस परोरा पटियाइ गइल बा

अब अलुआ में परवर भुलावे के ना
अब परवर में अलुवा मिलावे के बा
अब देसी चलानी में बांटे के
पिया पकल पनसोह तनी छाँटे के

अब लायक बड़कवन के नइखे परोरा ससताइ गइल बा
देख गाँजल बा सट्टी में बोरा के बोरा ससताइ गइल बा

जबले पाव भर के भावे बिकात रहुए
तले बड़िए सवाद से खवात रहुए
अब भावे बिकाता पसेरी के
का दो के खाई खा-खा के छेरी के

अछा, कुछ दिन में रेयर हो जाई परोरा, पटुआइ गइल बा
तब फेरू तनी फेयर हो जाई परोरा, पटुआइ गइल बा

...प्रकाश उदय


1. सट्टी - सब्जी मंडी/बाज़ार
2. परोरा - परवल
3. तुरहो जियत - थोड़ा बढ़ा कर तौलना
4. जोखना - तौलना
5. तियना -रसेदार
6. पटियाना - पट जाना
7. चलानी - पड़ोस
8. पकल पनसोह - पका हुआ और पानी भरा
9. छेरना - पतली दस्त होना
10. पटुआ जाना - कड़ा हो जाना

5 comments:

सतीश पंचम said...

वाह....एकदम मस्त कविता है।

सही कहा कि कितनी ब्याह तिलक समारोह आदि में परवल का महत्वपूर्ण रोल रहता है।

Rahul Singh said...

मजेदार और ठेठ स्‍वाद वाला. शायद सट्टी से ही हट्टी या हाट व्‍युत्‍पन्‍न है जैसे सिंधु से हिंदू.

Vivek Rastogi said...

गजब ही कविता है.. परवल का नाम पढ़कर दौड़े आये वाह !

Manoj Abhigyan said...

Apni boli me samayik kavita padhne ko mili. Badhai...!

अनूप शुक्ल said...

मजेदार रोचक कविता।