1/24/11

जोशी जी नहीं रहे...

जोशी जी नहीं रहे.
89 सालों की यायावरी भरी जिन्दगी में
उन्होंने हमें क्या तो नहीं दिया.
सुनने की तमीज़-तहजीब
और समझने की कूवत.
अब उनकी मेघ-मंद्र आवाज़ को सिर्फ रिकार्ड्स में ही सुना जा सकेगा.

वीरेन डंगवाल की ये कविता, श्रद्धांजलि के बतौर-

भीमसेन जोशी

मैं चुटकी में भर के उठाता हूँ
पानी की एक ओर-छोर डोर नदीसे
आहिस्ता
अपने सर के भी ऊपर तक

आलिंगन में भर लेता हूँ मैं
सबसे नटखट समुद्री हवा को

अभी अभी चूम ली हैं मैंने
पांच उसाँसे रेगिस्तानों की
गुजिस्ता रातों की सत्रह करवटें

ये लो
यह उड़ चली 120 की रफ़्तार से
इतनी प्राचीन मोटरकार

यह सब रियाज़ के दम पर सखी
या सिर्फ रियाज़ के दम पर नहीं!

आइये, एक मिनट के मौन के बाद सुनें, उनके गाये ये अभंग-






और
बाबुल मोरा नइहर छूटो ही जाय
सोचा न था की इसे ऐसे सुनना पडेगा....

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