2/2/11

उस्ताद अमीर खान साहब

एक बार पंडित भीमसेन जोशी से किसी ने चुहल करते कहा- 'आप तो समझ में आते हैं, पर अमीर खान साहब समझ में नहीं आते हैं.' जोशी जी अमीर खान साहब के गायन के मुरीद थे. सो उन्होंने पलटकर फरमाया- 'आप मुझे सुनिए. मैं अमीर खान साहब को सुनता हूँ.'
जोशी जी का यह कहना विनम्रता मात्र नहीं थी. सचमुच रेशम सी मखमली आवाज़ के मालिक उस्ताद अमीर खान साहब शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में मील के पत्थर हैं. मुरकी और तिहाई का जैसा सुन्दर इस्तेमाल खान साहब के यहाँ है, वह उन्हीं को सोभता है.

सुनिए राग मारवा में
गुरु बिन ज्ञान न पावे

और राग दरबारी में
किन बैरन कान भरे






उस्ताद अमीर खान (1912 -1974), संगीत की तालीम मुख्यतः अपने पिता शाहमीर खान से, इंदौर घराने के संस्थापक.

3 comments:

Neeraj Rohilla said...

राग मारवा वाला लिंक तो दिख ही नहीं रहा है। खान साहब को सुनना अपूर्व सुख देता है। बहुत आभार,

मृत्युंजय said...

नीरज जी, उसी फ़ाइल में पहला राग मारवा है और दूसरा दरबारी.

Rangnath Singh said...
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