2/12/11

दो उस्तादों के सुरों में बसंत-बहार

सुनिए

'केतकी गुलाब जूही चम्पक बन फूले' और
'कलियन संग करत रंगरलियाँ'
पंडित भीमसेन जोशी से

और
'पिया संग खेलूँ होरी'
उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से




1 comment:

Rahul Singh said...

बहुत खूब चयन.