3/20/11

होली- 3 (शोभा गुर्टू और नुसरत फ़तेह अली खान)




















फागु की भीर, अभीरनि में गहि गोविन्द लै गई भीतर गोरी
भाई करी मन की पद्माकर, ऊपर नाई अबीर की झोरी
छीनि पितंबर कम्मर तें, सु विदा दी मीडि कपोलन रोरी
नैन नचाय कही मुसकाय, 'लला फिर अइयो खेलन होरी'

पद्माकर के इस पद और होली की शुभकामनाओं के साथ सुनिए

आज बिरज में होली रे रसिया (शोभा गुर्टू)
आज रंग है (नुसरत फ़तेह अली खान)
हज़रत ख्वाजा संग खेलिए धमार (नुसरत फ़तेह अली खान)



1 comment:

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