6/5/11

डी वी पलुस्कर- तीन भजन


संगीत आचार्य विष्णु दिगंबर पलुस्कर के पुत्र और काबिल वारिस डी वी पलुस्कर का नाम उन संगीतज्ञों में शुमार किया जा सकता है, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत को राज-दरबारों से निकाल जन-दरबार तक पहुंचाया. उनके गाये छोटे-छोटे राग और भजन अद्भुत सृष्टि रचते हैं. उनको सुनते ही आपको राजा रवि वर्मा के चित्र की अगली कड़ी याद आ सकती है. पलुस्कर की कला स्वाधीनता आदोलन के साथ ही बढ़ी-विकसित हुई, सो आज हम वे सारी कमजोरियां और ताकत पलुस्कर के यहाँ भी देख सकते हैं, जो स्वाधीनता आन्दोलन के समय की भारतीय मनीषा में थी. पर इतिहास से गुजरना हमेशा ही हमें कुछ और समृद्ध कर देता है.

इसी सिलसिले में दूसरी बात यह कि छोटे-छोटे राग और भजनों व अन्य भी गीतों के लिए हमें आकाशवाणी का शुक्रगुजार होना चाहिए. एक पूरी पीढी का सौन्दर्याबोध इन से विकसित हुआ. आज भी ऐसी छोटी रिकार्डों की बेहद जरूरत है. इनसे श्रोता बढ़ते हैं.

सुनिए पंडित पलुस्कर से-

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...
ठुमुकि चलत रामचंद्र...
जब जानकी नाथ सहाय...




1 comment:

Anonymous said...

Write more, thats all I have to say. Literally, it seems as though you relied on the video to
make your point. You definitely know what youre talking about, why throw away your intelligence on just posting videos to your blog when you could be giving us something informative to read?
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