6/14/11

फिराक गोरखपुरी - बेगम अख्तर

आजकल मेरे एक दोस्त फ़िराक साहब को फिर से पढ़ रहे हैं.  कल उनसे फ़िराक की शायरी पर थोड़ी गुफ्तगू हो रही थी कि इसी सिलसिले में उन्होंने बताया कि फ़िराक साहब को किसी बड़े गायक ने नहीं गाया/ या कम से कम उन्होंने नहीं सुना.  तो कल से ही मैं अपनी याददाश्त की गठरी में ढूंढ रहा था, कि अचानक एक जबरदस्त ग़ज़ल याद आयी. न सिर्फ याद आयीं, बल्कि रिकार्ड भी खोजने पर हाथ लग गया. फिर क्या था! मैंने सोचा कि आप सबसे बांटा जाए.

ग़ज़ल ये रही-
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं ...



1 comment:

iqbal abhimanyu said...

सुभानअल्लाह लेकिन सिर्फ ३ मिनट की ही रिकार्डिंग है क्या.. अगर बाकी भी मिल जाती तो क्या कहने !