10/10/11

जगजीत के ग़ालिब

















जगजीत सिंह नहीं रहे.

लोग-बाग़ उन्हें बेहतरीन कलाकार मानते हैं. खासकर यह कहते हुए कि उन्होंने ग़ज़ल सुनने वाला एक श्रोता-वर्ग तैयार किया. पर कुछ तो मेरी सुनने की समझ और कुछ उनके बेकार बयानात के चलते वे मेरे पसंदीदा कलाकार न थे. (मैं गलत हो सकता हूँ.) पर 'मिर्ज़ा ग़ालिब' की उनकी गायकी बेहतरीन है. श्रद्धांजलिस्वरूप सुनिए इसी अल्बम से कुछ चुनिन्दा गज़लें-

4 comments:

बाबुषा said...

अच्छी गज़लें साझा करने के लिए शुक्रिया मृत्युंजय पर यह ज़रूरी नहीं कि हर किसी को हर कोई पसंद हो. तुम अपनी पसंद/नापसंद के बयान कमसकम आज के दिन के लिए तो टाल ही सकते थे कि हम जैसे उनके चाहने वालों को ये चुभता है..और कुछ दुखता है.. :-(

ZEAL said...

vinamr shraddhanjali

Khushdeep Sehgal said...

जग को जीत कहां तुम चले गए...

जय हिंद...

suraj kumar said...

Agar kisi ne ghazalon me zindagi ke darshan ko gaya toh woh jagjit ji the. eg.

''Kyon daren zindagi me kya hoga.
Kuchh na hoga to tazurba hoga."
waise jagjit ji ko yaad karne ke liye dhanyawaad.