7/4/12

राशिद खान- राग हंसध्वनि- लागी लगन पति सखी संग




राशिद खान के स्वर ऐसे लगते हैं जैसे कोई समूची परम्परा को नए सुरों में ढाल रहा हो. उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के इस चहेते गायक के स्वरों में एक खास गंगा-जमुनीपन है, जिसे आप इनकी कोई भी बंदिश सुनते हुए सुरों के सहारे महसूस कर लेते हैं. आई टी सी संगीत नाटक अकादमी, कलकत्ता से शिक्षण पाए इस कलाकार की दोनों बाहें परम्परा और आधुनिकता को सीने में भींच लेती हैं. प्रसंशा-कृपण पंडित भीमसेन जोशी ने ऐसे ही उस्ताद राशिद खान को हिन्दुस्तानी संगीत का भविष्य नहीं कहा था, यह कब का तय हो चुका है.

आज सुनिए उस्ताद राशिद खान से   
 -  लागी लगन पति सखी संग.

राग है हंसध्वनि, जो मुझे बेहद पसंद है. खासियत इस राग की यह कि यह हिन्दुस्तानी और कर्नाटक, दोनों में है.

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