8/8/12

सीमा आज़ाद और विश्विजय की रिहाई


सीमा आज़ाद और विश्वविजय के मुकदमे में अदालती फैसला  



परसों, ६ अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जस्टिस धरनीधर झा और जस्टिस अशोक पाल सिंह द्वारा सीमा आज़ाद और विश्वविजय को ज़मानत पर रिहा करने का  आदेश दिया गया. आज रात ८ बजे दोनों नैनी जेल से बाहर आ गए. यह सभी लोकतंत्रपसंद लोगों के लिए अच्छी खबर है और सीमा, विश्वविजय की रिहाई के लिए अभियानारत लोगों के लिए भी राहत देनेवाली खबर है. ज्ञातव्य है कि दोनों को राज्य के खिलाफ युद्ध करने अर्थात राज्यद्रोह के आरोप में इलाहाबाद जिला न्यायालय ने आजीवन कैद की सज़ा सुनायी थी. कल उच्च न्यायालय में ज़मानत की अपील पर  न्यायधीशों ने दोनों को ज़मानत पर रिहा करने का फैसला  चंद मिनटों में ही सुना दिया. उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता रविकिरण जैन की इस दलील को स्वीकार किया कि राजद्रोह का आरोप  किसी प्रमाण से पुष्ट नहीं होता. जो दस्तावेज़ उनके पास से बरामद किए गए वे मूलतः विचारधारा का प्रचार और दृष्टिकोण का प्रसार करने के निमित्त थे. इसके अलावा जो प्रमाण पेश किए गए वे दोनों लोगों द्वारा पुलिस के सामने दिए  गए अत्मारोपी बयान  और कहीं से कोई प्रमाण राजद्रोह का नहीं है. न्यायधीशों ने अगले आदेश तक जिला न्यायालय द्वारा दोनों पर ८०-८० हज़ार के जुर्माने की अदायगी पर भी रोक लगा दी है. उनकी ज़मानत २०-२० हज़ार के बांड पर हुई. अगर इससे अधिक के बांड का आदेश न्यायालय देता तो ज़मानत लेनेवालों का पुलिस सत्यापन किया जाता और रिहाई की प्रक्रिया में देरी होती. न्यायधीशों ने अपने आदेश में इसकी संभावना ही नहीं रहने दी.  अंग्रेज़ी में मूल आदेश नीचे दिया जा रहा है. कुल मिलाकर ये फैसला सभी लोकतंत्र पसंद लोगों को मुबारक हो. 


Court no. 42
Case- CRIMINAL APPEAL U/S 374 CR.P.C.NO.2343 OF 2012
Petitioner- VishwavijayMall@Kamal& Another
Respondent-State of U.P.
Petitioner Counsel-SwetashwaAgrawal, DeebaSiddiqui, Ravi Kiran Jain
Respondent Counsel- Govt. Advocate

Hon'ble DhanidharJha. JHon'ble Ashok Pal. J


After hearing the learned counsel for the parties, we find that the appellants have been convicted for an offence under some Special Act and Section 121 and 121A IPC.The submission is that offences under Section 121 and 121-A were not attracted on evidence. The seized documents were basically propagating ideology and disseminating views. Besides, the evidence is the self inculpatory statements before police of the two appellants and no evidence of waging war against was available.Considering the submissions , we direct appellants, amelyVishwavijay Mall @ Kamal and Smt. Seema Azad to be released on bail, during pendency of appeal, on furnishing a bond of Rs. 20000/-each with two suririties of the like amount each to the satisfaction of the learned District & Sessions Judge (Ex-cadre), Court No. 23, Allahabad or any other successor court to that court in connection with the sessions  Trial No. 707of 2010.As regards sentence of fine imposed upon the bovenotrd appellants, realization thereof shall remain stayed till further orders.Order Date- 6.8.2012

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