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प्रो. बनवारी लाल शर्मा और संत राम अभिलाष दास को श्रद्धांजलि

प्रकाशनार्थ 
जन संस्कृति मंच, प्रो. बनवारी लाल शर्मा और
संत राम अभिलाष दास को श्रद्धांजलि

इलाहाबाद, २७ जुलाई

इलाहाबाद की दो विभूतियों का एक ही दिन यानी २६ सितम्बर को अवसान नागरिक समाज की भारी क्षति है. दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय व्यक्तित्व थे और जीवन की आखिरी साँसों तक कर्मशील रहे. प्रो. बनवारी लाल शर्मा  ने जीवन भर गांधीवाद के दृष्टि-बिंदु से साम्राज्यवाद का विरोध किया, वे साम्प्रदायिकता के खिलाफ अग्रणी योद्धा रहे, जन-आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (एन.ए.पी.एम.) के नेता रहे  और सबसे बढ़ कर आचरण की सभ्यता के प्रतिमान रहे. आज जब देश का आम आदमी साम्राज्यवाद और उसके देशी दलालों द्वारा बुरी तरह पीसा जा रहा है, ऐसे समय जन आन्दोलनों के निर्भीक सत्याग्रही और संगठनकर्ता प्रो. शर्मा का निधनसाम्राज्यवाद  के खिलाफ  भारत  की आम  जनता के आन्दोलन के लिए  भीषण  आघात  है. 

प्रो. शर्मा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के गणितग्य थे, पर्यावरण की रक्षा और विश्व-शान्ति के लिए  लड़नेवाले ऐसे विद्वान् आन्दोलनकर्ता थे जिन्होंने छात्रों- नौजवानों की अनेक पीढ़ियों पर अपने जीवन-मूल्यों की छाप छोडी. जन संस्कृति  मंच प्रो. शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है और उनके तमाम चाहनेवालों और आन्दोलनकारी  साथियों   से उम्मीद  करता है कि वे  इस शोक को शक्ति में बदलने की हर चंद कोशिश करेंगे.
    
संत राम अभिलाष दास कबीरपंथी पारख संस्थान की आधारशिला रखने वाले तो थे ही, साथ ही वे एक सुधी संत और प्रखर बौद्धिक थे. वे कबीर संबंधी दुनिया में जहाँ कहीं, जिस भाषा में भी अध्ययन होता रहा, उसके ज्ञाता और पारखी थे. उनके शिष्यों की बड़ी संख्या समाज के दलित, उत्पीडित तबकों से आती है जिनमें वे कबीर की परम्परा में, आत्मस्वाभिमान का भाव जगाते रहे. उनका निधन सामाजिक  जागरण  की ताकतों   के लिए क्रूर  झटका  है. जन संस्कृति मंच उनके निधन पर शोक व्यक्त करता है और आशा करता है कि उनके बाद भी उनके अधूरे काम उनके शिष्य जारी रखेंगे.

राजेन्द्र कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जन संस्कृति मंच
प्रणय कृष्ण, महासचिव, जन संस्कृति मंच

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