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बी एच यू की घटना पर जसम का बयान

स्थानीय दबावों में विश्वविद्यालय प्रशासन काम नहीं करता
तो केंद्र सरकार तथा मानव संसाधन मंत्रालय को हस्तक्षेप करना चाहिए- जसम


प्रकाशनार्थ
दिल्ली : 27 जनवरी 2013 

आज देश में यौन हिंसा, लैंगिक भेदभाव, अन्याय और उत्पीड़न के सारे रूपों के खिलाफ महिलाओं की आजादी और बराबरी का आंदोलन चल रहा है और आम महिलाएं, छात्र-छात्राएं, युवक-युवतियां, बुद्धिजीवी, संस्कृतिकर्मी इसमें शामिल हैं, लेकिन इसी दौर में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थान में लगातार छात्राओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं घटित होना अत्यंत विडंबनापूर्ण है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, जो एक से बढ़कर एक जनतांत्रिक और प्रगतिशील विद्वानों और अध्येताओं की कर्मस्थली रहा है, अनेक बड़े छात्र-आन्दोलनों का साक्षी रहा है, वहां छात्राओं के साथ बदसलूकी करने वालों और उन्हें धमकी देने वाले के खिलाफ कोई कारर्वाई न होना आश्चर्यजनक है। उल्टे विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा के नाम पर छात्राओं को सात बजे के बाद हॉस्टल में कैद कर देने का पक्षधर रहा है। लेकिन मामला महज सात बजे के बाद का ही नहीं है, मामला दिनदहाड़े छात्राओं से की जाने वाली बदसलूकियों का भी है। 

जैसा कि बनारस के लगभग सभी समाचारपत्रों ने रिपोर्ट किया है कि विगत 24 जनवरी को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के बिड़ला हॉस्टल के कुछ दबंग छात्रों ने उधर से गुजर रही तीन छात्राओं के साथ जिस तरह बदसलूकी की और एक प्राध्यापक के हस्तक्षेप के बाद भी वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आए, वह कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंताएं खड़ी करता है। सूचना यह है कि चीफ प्रोक्टर की मौजूदगी में छात्राओं के पक्ष में खड़े छात्रों और प्राध्यापकों को भी उनलोगों ने धमकी दी, जिसके बाद आक्रोशित होकर लगभग सौ-सवा सौ छात्राओं और छात्रों ने कुलपति का घेराव किया। करीब चार घंटे तक घेराव के बाद कुलपति उनसे मिले और महिला सेल गठन तथा दोषी छात्रों को दंडित करने का आश्वासन दिया। 

गणतंत्र दिवस के दिन महिला सेल गठन करने की घोषणा कुलपति ने कर दी है, पर दोषी छात्रों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह भी आश्चर्यजनक है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे पुराने और केन्द्रीय विश्वविद्यालय में महिला सेल की स्थापना की घोषणा अब की गई है, जब कि अनेक विश्वविद्यालयों में यह संस्था कई वर्षों से काम कर रही है, यह दिखाता है कि अभी स्त्रियों के सम्मान और सुरक्षा के संघर्ष को कितनी विघ्न-बाधाओं से होकर गुजरना है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी न केवल उच्च शिक्षा का प्रतिष्ठित संस्थान है, बल्कि वह केन्द्रीय विश्वविद्यालय भी है। ऐसे में यदि स्थानीय दबावों में विश्वविद्यालय प्रशासन काम नहीं करता तो केंद्र सरकार तथा मानव संसाधन मंत्रालय को हस्तक्षेप करना चाहिए. छात्राओं ने दोषी छात्रों के बारे में नाम लेकर शिकायत की है. छेड़खानी करने और धमकी देने वाले वाले मुख्य दोषी छात्र की मौजूदा सरकार के एक मंत्री के साथ रिश्ते की सूचना भी अखबारों और सोशल मीडिया में आयी है. सवाल यह है कि बीएचयू प्रशासन आम छात्राओं का साथ देगा या नहीं? सत्ता संरक्षित दोषी छात्रों को दण्डित करेगा या नहीं?

छात्राओं के साथ दुव्यर्वहार करने वाले दोषी छात्रों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न किए जाने की जन संस्कृति मंच घोर निंदा करता है और बीएचयू कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान, समानता, न्याय व आजादी के लिए चल रहे छात्र-छात्राओं, बुद्धिजीवियों, साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों के संघर्ष के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर करता है। 

सुधीर सुमन 
राष्ट्रीय सहसचिव, जन संस्कृति मंच द्वारा जारी

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