3/7/13

ह्यूगो शावेज लाल सलाम ! जन संस्कृति मंच

महान साम्राज्यवाद-विरोधी योद्धा ह्यूगो शावेज को जसम की श्रद्धांजलि


21 वीं सदी के समाजवाद के स्वप्नद्रष्टा और अनुपम प्रयोगकर्ता तथा भूमंडलीकरण, निजीकरण और उदारीकरण की नई विश्व-व्यवस्था की अजेयता के मिथक को ध्वस्त करनेवाले महान जन-नायक और क्रांतिकारी, वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने 05 मार्च 2013 के दिन दुनिया को अलविदा कहा. पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से वे कैंसर से जूझते हुए अब तक पद की शपथ नहीं ले सके थे. दुनिया ने 21 वीं सदी का अब तक का महानतम साम्राज्यवाद-विरोधी योद्धा खो दिया. यह क्षति जितनी वेनेजुएला और लैटिन अमरीका की जनता की है, उतनी ही विश्व के तमाम शोषितों की है, जिन्हें शोक को शक्ति में बदलना है, उनके प्रयोगों को अंतिम जीत तक जारी रखना है. 

शावेज ने 21 वीं सदी में लैटिन अमरीका के साम्राज्यवाद-विरोधी उभार को 18 वीं- 19 वीं सदी के लैटिन अमरीका की स्पैनिश दासता से मुक्ति (साइमन बोलिवार द्वारा की गई क्रान्ति) की अगली कड़ी के रूप में परिभाषित किया. सैन्य अधिकारी रहे शावेज ने 1992 में अमरीका समर्थित वेनेजुएला के वहाँ नव-उदारवादी निजाम के खिलाफ नागरिक तख्तापलट की असफल कोशिश की और दो साल जेल में रहे. 1998 में साम्राज्यवाद-विरोधी ऐसे गठबंधन के प्रतिनिधि के बतौर वे चुनाव जीते जिसने देश के नए जनतांत्रिक संविधान का वायदा किया. नया संविधान एक साल के भीतर बना जो स्त्री-पुरुष समानता पर आधारित था, जिसमें स्त्रियों और मूल निवासियों को तमाम नए अधिकार दिए गए, राष्ट्रपति सहित सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार जनता को प्राप्त हुए, शिक्षा और स्वास्थ्य नागरिकों के मौलिक अधिकार बना दिए गए. 1998 से लेकर 2012 का चुनाव जीतने तक वे लगातार वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुने जाते रहे. अमरीकी षड्यंत्र से जब अप्रैल में उनके तख्ता-पलट की कोशिश की गई तो जनता ने सडकों पर उतर कर उसे नाकाम कर दिया. शावेज ने न केवल तेल कंपनियों का बल्कि टेलिकॉम सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया, बड़ी कंपनियों पर शिकंजा कसा और उन पर टैक्स बढाए, विश्व-बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष का क़र्ज़ चुका कर इनसे संबंध खत्म किया तथा 'बैंक आफ साउथ' नाम से दक्षिण अमरीकी देशों के अपने केन्द्रीय बैंक का में निर्माण किया. फिदेल कास्त्रो के साथ मिलकर शावेज ने अमरीकी वर्चस्व के विरुद्ध, उसके विकल्प के बतौर लैटिन अमरीकी देशों बोलीविया, क्यूबा, डोमोनिका, होंडूरास, निकारागुआ और वेनेजुएला का व्यापार संघ 'बोलीवारियन आल्टरनेटिव फॉर पीपुल्स ऑफ आवर अमेरिकाज़' (अल्बा) का निर्माण किया.

जब दिसंबर 2002 में बड़ी कंपनियों ने तालाबंदी करके अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश की, तो शावेज ने पूँजीपतियों द्वारा बंद किए गए कारोबारों को राज्य की भागीदारी के साथ श्रमिकों की समिति के हवाले कर दिया. विकास के ढाँचे, स्वशासन के तमाम मुद्दे और बजट के एक हिस्से को कैसे खर्च किया जाए, ये सार निर्णय हजारों सामुदायिक नागरिक समितियों (प्रत्येक समिति 200-400 परिवारों की है) के हवाले किए गए. 2004 से 2011 के बीच शावेज के नेतृत्व में वेनेजुएला की गरीबी घट कर आधी हो गई, बेरोजगारी बीस फीसदी से घट कर सात फीसदी हो गई, निरक्षरता समाप्त हो गई, वेनेजुएला की खेती योग्य ज़मीन का पचहत्तर फीसदी हिस्सा जो पहले महज पांच फीसदी लोगों के हाथ में था, उसके एक अच्छे-खासे हिस्से को सरकार ने अपने हाथों में लेकर सहकारी खेती कराना शुरू किया और लाखों परिवारों का पुनर्वास किया. शावेज ने अपने लाए संविधान में निर्वाचित प्रतिनिधियों को वापस बुलाए जाने के अधिकार की पहली अग्नि-परीक्षा खुद दी. २००४ में उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए हुए जनमत संग्रह में वे विजयी हुए. 20 सितंबर 2006 के दिन संयुक्त राष्ट्रसंघ की जनरल असेम्बली में बोलते हुए शावेज ने अमरीकी साम्राज्यवाद को ललकारते हुए कहा था, "ओ विश्व के तानाशाह! मुझे महसूस होता है कि तुम्हारे जीवन के बाकी के दिन दु:स्वप्न की तरह बीतेंगे"। सचमुच वे जीवन के अंत तक साम्राज्यवादियों और फासीवादी ताकतों के लिए दु:स्वप्न बने रहे और उनके हमले झेलते रहे.

शावेज के नेतृत्व में वेनेजुएला तमाम लैटिन अमरीकी देशों को खुले हाथों हर तरह की मदद करता रहा. 2008 में तबाही और अन्न के लिए दंगे झेल रहे हैती को शावेज ने अपने देश से 364 टन गोश्त, सब्जियां और अनाज भिजवाए. अमरीकी राजसता के भीषण विरोधी शावेज वहाँ की गरीब जनता को बेहद प्यार करते थे जिसका प्रमाण उन्होंने बारम्बार दिया, खासतौर पर कैटरीना समुद्री तूफ़ान के समय राहत की पेशकश करके.

वे लैटिन अमरीका ही नहीं, बल्कि इरान, ईराक, फिलिस्तीन, लेबनान -यानी हर वो देश जो अमरीकी साम्राज्यवाद का सताया हुआ थ, उसके हितों के सर्वोत्तम विश्व प्रवक्ता थे.

शावेज अब शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मानवीय-मुक्ति के इतिहास में वे अमर रहेंगे. उनकी स्मृति को हमारा सलाम!

सुधीर सुमन
राष्ट्रीय सहसचिव, जन संस्कृति मंच द्वारा जारी

1 comment:

premshanker said...

कॉमरेड शावेज को लाल सलाम