2/24/14

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले के खिलाफ

जन संस्कृति मंच

दिनांक २१ फरवरी के दिन दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में वरिष्ठ आलोचक मैनेजर पाण्डेय की पुस्तकों के लोकार्पण के बाद वरिष्ठ कवि अशोक वाजपेई के साथ उनके संवाद के दौरान कुछेक साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा व्यवधान डालने और हल्ला हंगामा खड़ा करने की हम घोर निंदा करते हैं. संवाद और बहस मुबाहसे से घबराए ये तत्व वास्तव में लोगों की आलोचनात्मक चेतना से डरते हैं और जोर-ज़बरदस्ती से अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने में ही खुद को सुरक्षित समझते है .इन तत्वों के पास किसी भी साहित्यिक विमर्श को समझने की न सलाहियत है और न नीयत, उसमें लोकतांत्रिक हस्तक्षेप तो दूर की बात है .

पुस्तक मेले के ही दौरान पेंगुइन द्वारा वेंडी डोनिगर की पुस्तक की प्रतियां बाज़ार से हटा लिए जाने के विरोधस्वरूप १६ फरवरी के दिन आयोजित उक्त पुस्तक के पाठ के आयोजन के दौरान भी खुद को 'हिन्दू सेना' का सदस्य बताने वाले तत्वों ने व्यवधान डाला. इनमें से शायद ही किसी प्रदर्शनकारी ने डोनिगर की साढ़े छः सौ पृष्ठों की पुस्तक का मुंह भी देखा हो. शासन-प्रशासन की जिन एजेंसियों पर दायित्व है कि वे अभिव्यक्ति की आज़ादी के मौलिक अधिकार की रक्षा करें, उन्हें बगैर किसी दबाव में आए यह सुनिश्चित करना होगा. लेखक और बुद्धिजीवी ऐसे तत्वों के आगे न तो खामोश रहेंगे और न ही अभिव्यक्ति की आज़ादी के दमन को बर्दाश्त करेंगे.

प्रणय कृष्ण 
 महासचिव, जन संस्कृति मंच

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